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दायरा (Daayra) मेघना गुलज़ार (Meghna Gulzar) के निर्देशन में बनी हिंदी क्राइम ड्रामा है, जिसमें करीना कपूर खान (Kareena Kapoor Khan) और पृथ्वीराज सुकुमारन (Prithviraj Sukumaran) मुख्य भूमिकाओं में हैं। इस दायरा मूवी रिव्यू में हम देखेंगे कि फिल्म एक दिल दहला देने वाले आपराधिक मामले और उसके बाद शुरू हुई जांच के इर्द-गिर्द कैसे घूमती है। साथ ही यह कहानी उस फर्क को भी टटोलती है, जो कानूनी प्रक्रिया और जनता की “फौरन इंसाफ” वाली मांग के बीच मौजूद है।
फिल्म 18 सितंबर 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज़ हुई। लगभग 143 मिनट के रनटाइम और A सर्टिफिकेट के साथ आई यह फिल्म वयस्क दर्शकों के लिए बनाई गई है और गंभीर, परिपक्व विषय को छूती है।
दायरा रिलीज़ डेट और मूवी डिटेल्स
दायरा भारतीय सिनेमाघरों में 18 सितंबर 2026 को पहुंची।
यह फिल्म मेघना गुलज़ार को करीना कपूर खान और पृथ्वीराज सुकुमारन के साथ एक ऐसे पुलिस ड्रामा के लिए जोड़ती है, जिसकी नींव एक विवादित केस पर टिकी है। हीरो बनाम विलेन वाले पारंपरिक ढांचे पर चलने के बजाय कहानी दो वरिष्ठ पुलिस अफसरों को एक ही जांच के दो अलग-अलग छोरों पर खड़ा कर देती है।
दायरा मूवी की पूरी जानकारी
| श्रेणी | जानकारी |
|---|---|
| फिल्म | दायरा (Daayra) |
| रिलीज़ डेट | 18 सितंबर 2026 |
| भाषा | हिंदी |
| जॉनर | क्राइम, ड्रामा, थ्रिलर |
| निर्देशक | मेघना गुलज़ार |
| मुख्य कलाकार | करीना कपूर खान, पृथ्वीराज सुकुमारन |
| किरदार | डीसीपी अजूनी कोहली, डीसीपी रमन कुमार |
| रनटाइम | लगभग 143 मिनट |
| सर्टिफिकेशन | A |
| संगीत | अमित त्रिवेदी (Amit Trivedi) |
| गीत | गुलज़ार (Gulzar) |
| प्रोडक्शन | जंगली पिक्चर्स (Junglee Pictures), पेन स्टूडियोज़ (Pen Studios) |
स्क्रीनप्ले का क्रेडिट मेघना गुलज़ार, सीमा अग्रवाल (Sima Agarwal) और यश केसवानी (Yash Keswani) को दिया गया है।
दायरा की स्टारकास्ट और किरदार
डीसीपी अजूनी कोहली के रोल में करीना कपूर खान
करीना कपूर खान ने डीसीपी अजूनी कोहली का किरदार निभाया है, जो एक जांच अधिकारी हैं और जिन्हें एक विवादित पुलिस एनकाउंटर की पड़ताल सौंपी जाती है।
अजूनी इस मामले को नियम-कायदों और सबूतों की कसौटी पर परखती हैं। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ती है, उन्हें सिर्फ मूल अपराध ही नहीं, बल्कि उसके बाद पुलिस ने जो कदम उठाए, उनकी भी छानबीन करनी पड़ती है।

डीसीपी रमन कुमार के रोल में पृथ्वीराज सुकुमारन
पृथ्वीराज सुकुमारन डीसीपी रमन कुमार बने हैं, एक सीनियर पुलिस अफसर जिनका इस केस को देखने का नज़रिया अजूनी से बिल्कुल उलट है।
फिल्म के केंद्र में जो एनकाउंटर है, उससे रमन के फैसले सीधे जुड़े हुए हैं। उनका किरदार उस सोच की नुमाइंदगी करता है कि पारंपरिक कानूनी रास्ते कई बार पीड़ितों को न्याय दिलाने में नाकाम रहते हैं, और पुलिस की सख्त कार्रवाई इंसाफ का तेज़ ज़रिया लग सकती है।
रमन और अजूनी के बीच का यही टकराव पूरी फिल्म की रीढ़ है।
सपोर्टिंग कास्ट
सहायक कलाकारों में जितेंद्र जोशी (Jitendra Joshi), क्षिती जोग (Kshitee Jog), कंवलजीत सिंह (Kanwaljeet Singh), संदीप कुलकर्णी (Sandeep Kulkarni), तृप्ति खामकर (Trupti Khamkar) समेत कई और चेहरे शामिल हैं।
सपोर्टिंग परफॉर्मेंस में समीक्षकों ने खास तौर पर क्षिती जोग का ज़िक्र किया है, जिन्होंने रागिनी की मां का रोल निभाया है और कहानी में गहरा भावनात्मक वज़न जोड़ा है।
दायरा की कहानी और प्लॉट
यह हिस्सा स्पॉइलर-फ्री है
फिल्म की शुरुआत तब होती है जब एक युवती, रागिनी पुजारी, एक जघन्य अपराध का शिकार बनती है। चार लोगों पर आरोप लगते हैं, और इसके बाद डीसीपी रमन कुमार और उनकी टीम एक पुलिस एनकाउंटर में चारों संदिग्धों को मार गिराती है।
जनता इस घटना का खुलकर स्वागत करती है, लेकिन जल्द ही सवाल उठने लगते हैं कि क्या यह एनकाउंटर कानून के दायरे में हुआ था।
जो कुछ हुआ, उसकी जांच के लिए डीसीपी अजूनी कोहली को लाया जाता है। उनकी तफ्तीश उन्हें मूल अपराध, आरोपियों और पुलिस ऑपरेशन से जुड़ी घटनाओं तक वापस ले जाती है।
इस तरह दो आपस में जुड़ी जांचें सामने आती हैं: एक रागिनी के साथ हुए अपराध की, और दूसरी आरोपियों के एनकाउंटर की।
नतीजा यह कि कहानी का फोकस सिर्फ अपराधियों की पहचान से हटकर इस बात पर आ जाता है कि जब जनता का गुस्सा, पुलिस की कार्रवाई और कानूनी प्रक्रिया आपस में टकराते हैं, तब संस्थाएं कैसे जवाब देती हैं।
फिल्म का असली संघर्ष अजूनी और रमन के विरोधी रुख से पैदा होता है। एक तय कानूनी प्रक्रिया (ड्यू प्रोसेस) पर अड़ी हैं, तो दूसरा उस सिस्टम के खिलाफ ज़्यादा आक्रामक जवाब का प्रतीक है, जिसके बारे में उसे लगता है कि वह पीड़ितों का साथ देने में चूक गया।
क्या दायरा सच्ची घटना पर आधारित है?
हां, दायरा असल घटनाओं से प्रेरित है, लेकिन इसे किसी डॉक्यूमेंट्री या किसी वास्तविक केस का हूबहू रीक्रिएशन मानना ठीक नहीं होगा।
कई रिपोर्ट्स ने फिल्म के प्लॉट को 2019 के हैदराबाद रेप-मर्डर केस और उसके बाद आरोपियों के पुलिस एनकाउंटर से जोड़ा है। वहीं, फिल्म अपनी कहानी गढ़ने के लिए काल्पनिक किरदारों और काल्पनिक पृष्ठभूमि का सहारा लेती है।
यह अंतर समझना ज़रूरी है, क्योंकि दर्शकों को असली घटनाओं से समानताएं नज़र आ सकती हैं, पर फिल्म के किरदारों और नाटकीय हालात को अपने-आप किसी वास्तविक व्यक्ति से जोड़ देना सही नहीं है।

डायरेक्शन, स्क्रीनप्ले और परफॉर्मेंस
मेघना गुलज़ार ने इस विषय को एक आम एक्शन फिल्म बनाने के बजाय प्रोसीजरल ड्रामा की शक्ल में पेश किया है।
जांच को केस की बारीकियों और दोनों अफसरों के विरोधी विचारों के आसपास बुना गया है। इससे स्क्रीनप्ले को यह स्थापित करने का वक्त मिलता है कि रमन और अजूनी एक ही स्थिति को अलग-अलग नज़र से क्यों देखते हैं।
हालांकि, प्रकाशित समीक्षाओं में इस पर एक राय नहीं है कि स्क्रीनप्ले इन विचारों को कितनी असरदार तरीके से आगे बढ़ा पाता है।
इंडिया टुडे (India Today) को फिल्म के मूल सवाल दमदार लगे, लेकिन उसका मानना है कि पटकथा विषय को पर्याप्त गहराई तक नहीं ले जाती और बीच में रफ्तार खो देती है।
द इंडियन एक्सप्रेस (The Indian Express) ने भी पृथ्वीराज के संयमित अभिनय की तारीफ की, पर यह सवाल उठाया कि स्क्रीनप्ले में करीना के किरदार को कितनी अच्छी तरह विकसित किया गया है।
दूसरी ओर, एनडीटीवी (NDTV) परफॉर्मेंस को लेकर ज़्यादा सकारात्मक रहा और उसने फिल्म को ऐसा पुलिस ड्रामा बताया जो थ्रिलर के तत्वों को प्रोसीजरल इन्वेस्टिगेशन के साथ मिलाता है।
करीना कपूर खान की एक्टिंग
करीना की अजूनी को एक शांत, संतुलित अफसर के रूप में लिखा गया है, जिनका पेशेवर पद उन्हें एनकाउंटर पर सवाल करने के लिए मजबूर करता है।
यह रोल शारीरिक एक्शन से ज़्यादा अधिकार, संवाद और तहकीकात पर टिका है। कुछ शुरुआती प्रतिक्रियाओं में उनकी स्क्रीन प्रेज़ेंस की सराहना हुई है, जबकि कुछ समीक्षाओं का कहना है कि पटकथा उनके किरदार को ज़रूरी गहराई नहीं देती।
पृथ्वीराज सुकुमारन की एक्टिंग
रमन कुमार के किरदार के लिए पृथ्वीराज को कई समीक्षकों से अपेक्षाकृत ज़्यादा तवज्जो मिली है।
यह किरदार आसानी से एक सीधा-सादा खलनायक बनकर रह सकता था, मगर पृथ्वीराज का अभिनय यह दिखाने की कोशिश करता है कि रमन अपने कदमों को जायज़ क्यों मानता है। मिसाल के तौर पर, द इंडियन एक्सप्रेस ने उनकी परफॉर्मेंस को नपी-तुली और प्रभावी बताया।
इसी वजह से रमन फिल्म की केंद्रीय बहस का एक अहम हिस्सा बन जाता है।
दायरा मूवी रिव्यू: क्रिटिक्स क्या कह रहे हैं
यह हिस्सा प्रकाशित समीक्षाओं का सार प्रस्तुत करता है, स्वतंत्र रिव्यू नहीं।
थिएटर में रिलीज़ के बाद से दायरा को समीक्षकों से मिली-जुली प्रतिक्रिया मिली है।
रिव्यूज़ में बार-बार उभरने वाली एक बात फिल्म का मूल विचार है। आलोचकों ने आम तौर पर माना है कि कहानी का विषय मज़बूत है: यह एक पारंपरिक आपराधिक जांच के साथ पुलिस एनकाउंटर, ड्यू प्रोसेस और जनता के दबाव से जुड़े सवालों को एक साथ रखती है।
असहमति ज़्यादातर फिल्म के एग्ज़ीक्यूशन को लेकर है।
इंडिया टुडे के मुताबिक फिल्म में अहम विचार तो हैं, पर उसका अंतिम असर उतना गहरा नहीं, जितना ऐसा विषय मांगता है।
द इंडियन एक्सप्रेस ने पृथ्वीराज की अदाकारी को सराहा, लेकिन करीना के किरदार की हैंडलिंग पर कड़ा रुख अपनाया।
हिंदुस्तान टाइम्स (Hindustan Times) ने फिल्म के नैतिक रूप से उलझे विषय को रेखांकित किया और साथ में यह भी कहा कि शुरुआती हिस्सा धीमा महसूस हो सकता है।
वहीं एनडीटीवी ने लीड कलाकारों के काम और फिल्म के प्रोसीजरल अंदाज़ का ज़्यादा अनुकूल आकलन किया।
कुल मिलाकर, फिल्म ने चर्चा तो पैदा की है, पर आलोचकों की राय एकसुर नहीं रही। पुलिस प्रोसीजरल और सामाजिक मुद्दों वाली क्राइम ड्रामा फिल्मों में दिलचस्पी रखने वालों के लिए इसका विषय, इसके आम थ्रिलर एलिमेंट्स से ज़्यादा मायने रख सकता है।

दायरा का रनटाइम, सर्टिफिकेशन और म्यूज़िक
दायरा का रनटाइम लगभग 143 मिनट है, यानी फिल्म दो घंटे से कुछ ज़्यादा लंबी है।
फिल्म को A सर्टिफिकेट मिला है, जो इसकी परिपक्व थीम और विचलित करने वाले विषय को दर्शाता है।
संगीत अमित त्रिवेदी ने दिया है और गीत गुलज़ार ने लिखे हैं।
फिल्म में संगीत, जांच और किरदारों के ड्रामे के मुकाबले दूसरे नंबर पर रहता है। इससे पूरी प्रस्तुति कहानी पर केंद्रित रहती है और यह गानों से भरी कमर्शियल फिल्म नहीं बनती।
दायरा किसे देखनी चाहिए?
दायरा मुख्य रूप से उन दर्शकों के लिए है जिन्हें ये चीज़ें पसंद हैं:
- पुलिस और इन्वेस्टिगेटिव ड्रामा
- सच्ची घटनाओं से प्रेरित क्राइम थ्रिलर
- कानूनी और नैतिक सवालों से जूझती फिल्में
- किरदारों पर आधारित कहानियां
- गंभीर हिंदी सिनेमा
अगर आप लगातार ट्विस्ट वाली तेज़ रफ्तार एक्शन थ्रिलर की उम्मीद कर रहे हैं, तो शायद यह फिल्म आपके लिए सही चुनाव न हो।
टिकट बुक करने से पहले A सर्टिफिकेट को भी ध्यान में रखें, खासकर इसलिए कि फिल्म यौन हिंसा, हत्या और पुलिस हिंसा जैसे मुद्दों को दिखाती है।
आखिरी राय
हमारे दायरा मूवी रिव्यू का निचोड़ यह है कि फिल्म एक पुलिस जांच को प्रक्रिया, सत्ता और जवाबदेही की व्यापक पड़ताल के साथ जोड़ती है। करीना कपूर खान और पृथ्वीराज सुकुमारन ऐसे दो अफसरों के रूप में फिल्म की अगुवाई करते हैं, जिनके अलग-अलग तौर-तरीके कहानी का केंद्र बन जाते हैं।
परिपक्व विषय, तहकीकात वाले मिज़ाज और 143 मिनट की लंबाई के चलते यह फिल्म उन दर्शकों को ज़्यादा भाएगी, जो पारंपरिक एक्शन थ्रिलर की जगह संजीदा क्राइम ड्रामा देखना पसंद करते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
दायरा कब रिलीज़ हुई?
दायरा 18 सितंबर 2026 को भारतीय सिनेमाघरों में रिलीज़ हुई।
दायरा का निर्देशन किसने किया है?
इस फिल्म की निर्देशक मेघना गुलज़ार हैं।
दायरा में अजूनी कोहली का किरदार कौन निभा रहा है?
डीसीपी अजूनी कोहली के रोल में करीना कपूर खान नज़र आती हैं।
रमन कुमार का रोल किसने किया है?
डीसीपी रमन कुमार का किरदार पृथ्वीराज सुकुमारन ने निभाया है।
क्या दायरा सच्ची कहानी पर बनी है?
दायरा असल घटनाओं, खासकर 2019 के हैदराबाद केस और उसके बाद हुए पुलिस एनकाउंटर से प्रेरित है, लेकिन फिल्म की कहानी और किरदार काल्पनिक रूप में पेश किए गए हैं।
दायरा कितनी लंबी फिल्म है?
फिल्म की अवधि करीब 143 मिनट है।
दायरा को कौन-सा सर्टिफिकेट मिला है?
भारत में दायरा को A सर्टिफिकेट दिया गया है।
दायरा का म्यूज़िक किसने दिया है?
संगीतकार अमित त्रिवेदी हैं, जबकि गीतों का क्रेडिट गुलज़ार को जाता है।
क्या दायरा फैमिली के साथ देखने लायक है?
गंभीर विषय और A सर्टिफिकेशन की वजह से यह फिल्म वयस्क दर्शकों के लिए है, परिवार के साथ आम तौर पर देखने के लिए नहीं।
दायरा किस जॉनर की फिल्म है?
मेघना गुलज़ार की दायरा मुख्य रूप से एक क्राइम ड्रामा और इन्वेस्टिगेटिव थ्रिलर है।




