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लास्ट मैन इन टावर (Last Man in Tower) साल 2026 की हिंदी ड्रामा फिल्म है, जिसका निर्देशन बेन रेखी (Ben Rekhi) ने किया है। मुख्य भूमिकाओं में मनोज बाजपेयी (Manoj Bajpayee), दिव्या दत्ता (Divya Dutta) और बोमन ईरानी (Boman Irani) नज़र आते हैं। अगर आप लास्ट मैन इन टावर रिव्यू, कास्ट और कहानी के बारे में जानना चाहते हैं, तो पहले यह समझ लीजिए कि यह फिल्म अरविंद अडिगा (Aravind Adiga) के 2011 में आए इसी नाम के उपन्यास पर आधारित है। इसके केंद्र में एक रिटायर्ड स्कूल टीचर है, जो ज़िंदगी बदल देने वाला एक ऑफर ठुकरा देता है और इसी फैसले की वजह से अपने ही पड़ोसियों से टकराव में आ जाता है।
फिल्म भारत के सिनेमाघरों में 11 सितंबर 2026 को रिलीज़ हुई। इसकी लंबाई 1 घंटा 37 मिनट है और इसे UA 16+ सर्टिफिकेट वाली हिंदी ड्रामा के तौर पर सूचीबद्ध किया गया है।
लास्ट मैन इन टावर: फिल्म से जुड़ी अहम जानकारी
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| फिल्म | लास्ट मैन इन टावर (Last Man in Tower) |
| रिलीज़ डेट | 11 सितंबर 2026 |
| भाषा | हिंदी |
| जॉनर | ड्रामा |
| रनटाइम | 1 घंटा 37 मिनट |
| सर्टिफिकेट | UA 16+ |
| निर्देशक | बेन रेखी |
| पटकथा (स्क्रीनप्ले) | सूनी तारापोरवाला (Sooni Taraporevala) |
| संवाद लेखक | जूही चतुर्वेदी (Juhi Chaturvedi) |
| संगीत | गोविंद वसंथा (Govind Vasantha) |
| सिनेमैटोग्राफी | रंगराजन रामबद्रन (Rangarajan Rambadran) |
| प्रोडक्शन | स्पिरिट मीडिया (Spirit Media) |
BookMyShow पर फिलहाल बेन रेखी को निर्देशक के साथ-साथ निर्माता के रूप में भी दर्ज किया गया है। उनके अलावा राणा दग्गुबाती (Rana Daggubati), गुनीत डोगरा (Guneet Dogra) और प्रतीक्षा राव (Pratiksha Rao) को भी प्रोड्यूसर का क्रेडिट मिला है। उसी लिस्टिंग के अनुसार स्क्रीनप्ले सूनी तारापोरवाला ने लिखा है, डायलॉग जूही चतुर्वेदी के हैं, म्यूज़िक गोविंद वसंथा ने दिया है और कैमरे की कमान रंगराजन रामबद्रन ने संभाली है।
लास्ट मैन इन टावर की स्टार कास्ट
फिल्म के प्रमुख कलाकारों की सूची इस प्रकार है:
- मनोज बाजपेयी – मास्टरजी के किरदार में
- दिव्या दत्ता
- बोमन ईरानी
- सुकांत गोयल (Sukant Goel)
- हरीश खन्ना (Harish Khanna)
- चंदन रॉय सान्याल (Chandan Roy Sanyal)
- उज्ज्वल चोपड़ा (Ujjwal Chopra)
- स्वरूपा घोष (Swaroopa Ghosh)
- उदय चंद्रा (Uday Chandra)
- माधुरी भाटिया (Madhuri Bhatia)
- श्रीकांत यादव (Shrikant Yadav)
- सलीम सिद्दीकी (Salim Siddiqui)
BookMyShow और JustWatch की मौजूदा लिस्टिंग में ये सभी कलाकार फिल्म की एन्सेम्बल कास्ट का हिस्सा बताए गए हैं, और मास्टरजी की भूमिका का क्रेडिट मनोज बाजपेयी के नाम है।
लास्ट मैन इन टावर का निर्देशन किसने किया?
लास्ट मैन इन टावर को बेन रेखी ने डायरेक्ट किया है और वे इसके निर्माताओं में भी शामिल हैं।
अरविंद अडिगा के उपन्यास को परदे के लिए ढालने का काम सूनी तारापोरवाला ने किया, जबकि संवाद जूही चतुर्वेदी की कलम से निकले हैं। इस जोड़ी की बदौलत मूल किताब की आत्मा और हिंदी दर्शकों के लिए खास तौर पर तैयार की गई पटकथा, दोनों एक साथ फिल्म में दिखाई देती हैं।
लास्ट मैन इन टावर की कहानी
कहानी मास्टरजी के इर्द-गिर्द घूमती है, जो मुंबई की एक हाउसिंग सोसाइटी में रहने वाले रिटायर्ड स्कूल टीचर हैं।
रीडेवलपमेंट का एक प्रस्ताव आता है, जो सोसाइटी के लोगों को अपनी पुरानी इमारत छोड़कर आगे बढ़ने का मौका देता है। मास्टरजी के आसपास के ज़्यादातर लोग इस पेशकश पर विचार करने को तैयार हैं, लेकिन वे खुद इसके लिए राज़ी नहीं होते।
उनका इनकार उन्हें पड़ोसियों और इस प्रोजेक्ट से जुड़े लोगों के सामने खड़ा कर देता है। जैसे-जैसे यह मतभेद खिंचता है, निवासियों को अपनी अलग-अलग प्राथमिकताओं और समुदाय के भविष्य को लेकर टकराती सोच से जूझना पड़ता है।
मास्टरजी का विरोध धीरे-धीरे ऐसा मुद्दा बन जाता है जिसे आसपास के लोग नज़रअंदाज़ नहीं कर पाते। एक अकेले निवासी की ना से शुरू हुई बात आगे चलकर भरोसे, दबाव और उन फैसलों के बड़े विवाद में बदल जाती है, जो बरसों से साथ रहते आए लोग एक-दूसरे के बारे में लेते हैं।
फिल्म के आधिकारिक थिएट्रिकल सिनॉप्सिस में भी यही बताया गया है कि मास्टरजी का इनकार ही वह फैसला है जो पड़ोसियों के साथ तनाव पैदा करता है और पूरी सोसाइटी को अपने विकल्पों और समझौतों का सामना करने पर मजबूर कर देता है।
फिल्म का असली फोकस क्या है
रीडेवलपमेंट का यह विवाद फिल्म को सामुदायिक दबाव और निजी पसंद जैसे विषयों को टटोलने का ज़रिया देता है, और कहानी किसी आम प्रॉपर्टी ड्रामा जैसी नहीं रह जाती।
हर निवासी इस ऑफर को एक ही नज़र से नहीं देखता। हर परिवार पर इसका असर अलग पड़ता है, और मास्टरजी की ज़िद उन लोगों के लिए मुसीबत बन जाती है जो पहले ही तय कर चुके हैं कि आगे बढ़ना उनके हित में है।
मुंबई की पृष्ठभूमि भी कहानी में अहम भूमिका निभाती है। द इंडियन एक्सप्रेस (The Indian Express) ने फिल्म को शहरी विकास और तरक्की से जुड़े सामाजिक व नैतिक सवालों के संदर्भ में परखा है।
इसी वजह से हाउसिंग सोसाइटी यहां सिर्फ़ एक बैकग्राउंड नहीं है। यही वह जगह है जहां फिल्म के सारे मतभेद सामने आते हैं, और जहां एक प्रॉपर्टी से जुड़ा फैसला पड़ोसियों के रिश्तों को प्रभावित करने लगता है।

मास्टरजी के रोल में मनोज बाजपेयी
मनोज बाजपेयी मास्टरजी बने हैं, वही रिटायर्ड शिक्षक जिनका इनकार पूरी कहानी के टकराव की जड़ है।
जैसे-जैसे रीडेवलपमेंट प्रस्ताव को उनके आसपास समर्थन मिलता जाता है, यह किरदार मुश्किल हालात में घिरता चला जाता है। इसलिए उनकी लड़ाई सिर्फ़ बिल्डर से नहीं रहती, बल्कि उस समुदाय के लोगों से भी हो जाती है जिन्हें वे सालों से जानते हैं।
समीक्षाओं में बाजपेयी के अभिनय पर खास ध्यान दिया गया है। द इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक यह फिल्म शहरी विकास की सामाजिक और नैतिक कीमत पर सवाल उठाती है, और उस संघर्ष के केंद्र में बाजपेयी की भूमिका को प्रमुखता से रेखांकित करती है।
दिव्या दत्ता और बोमन ईरानी
फिल्म के बाकी प्रमुख कलाकारों में दिव्या दत्ता और बोमन ईरानी दो अहम नाम हैं।
दत्ता ने संगीता पुरी का किरदार निभाया है, जबकि ईरानी धर्मेन शाह बने हैं, जो रीडेवलपमेंट प्रस्ताव से जुड़े डेवलपर हैं।
दोनों के किरदार इस विवाद में अलग-अलग मोर्चों पर खड़े हैं, जिससे निवासियों के सामने खड़े फैसले को फिल्म एक से ज़्यादा नज़रियों से दिखा पाती है। बड़ी सहायक कास्ट में सुकांत गोयल, हरीश खन्ना, चंदन रॉय सान्याल, उज्ज्वल चोपड़ा और स्वरूपा घोष भी शामिल हैं।
लास्ट मैन इन टावर रिव्यू: क्रिटिक्स क्या कह रहे हैं
शुरुआती समीक्षाओं का ध्यान मुख्य रूप से तीन बातों पर रहा है: कलाकारों का अभिनय, रीडेवलपमेंट का टकराव और अरविंद अडिगा के उपन्यास का फिल्मी रूपांतरण।
द इंडियन एक्सप्रेस का फोकस फिल्म के उन सवालों पर है जो शहरी विकास और किसी रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट के सामाजिक नतीजों से जुड़े हैं। अखबार की समीक्षा में बीच में फंसे निवासी के रूप में मनोज बाजपेयी की परफॉर्मेंस पर भी बात की गई है।
दूसरे रिव्यूज़ ने भी अभिनय पक्ष को गंभीरता से लिया है, खासकर मास्टरजी के रूप में बाजपेयी के काम और उनके इर्द-गिर्द के सहायक कलाकारों के योगदान को।
हालांकि आलोचकों की चर्चा सिर्फ़ एक्टिंग तक सीमित नहीं है। रूपांतरण भी बहस का विषय बना है, खासकर अडिगा की किताब से तुलना के मामले में। इस कारण फिल्म की प्रतिक्रिया को केवल इस पैमाने पर नहीं आंका जा सकता कि कास्ट को कितनी सराहना मिली।
अगर आप तय कर रहे हैं कि फिल्म से क्या उम्मीद रखें, तो उपलब्ध समीक्षाएं इसे एक किरदार-केंद्रित सामाजिक ड्रामा बताती हैं। अभिनय और रीडेवलपमेंट वाले प्लॉट को अच्छी-खासी तवज्जो मिली है, जबकि मूल उपन्यास को परदे पर उतारने का तरीका चर्चा का एक और पहलू बना हुआ है।
लास्ट मैन इन टावर: किताब बनाम फिल्म
लास्ट मैन इन टावर अरविंद अडिगा के 2011 के उपन्यास पर बनी है।
किताब और फिल्म दोनों की बुनियादी कहानी एक जैसी है: मुंबई की एक रिहायशी सोसाइटी रीडेवलपमेंट के मुहाने पर खड़ी है, और एक निवासी उस स्थिति को मानने से इनकार कर देता है जिसे उसके ज़्यादातर पड़ोसी अपनाने को तैयार हैं।
रूपांतरण को लेकर जो सबसे बड़ा अंतर चर्चा में है, वह यह है कि दोनों संस्करणों के पास व्यापक सामाजिक दुनिया को खंगालने की कितनी गुंजाइश है।
उपन्यास निवासियों, उनकी मंशाओं और रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट के आसपास बदलते सामाजिक माहौल पर ज़्यादा वक्त खर्च कर सकता है। वहीं 97 मिनट के रनटाइम वाली फिल्म को वही संघर्ष जल्दी स्थापित करना पड़ता है, इसलिए उसका ज़ोर उन किरदारों पर ज़्यादा है जो इस टकराव में सीधे शामिल हैं।
जिन पाठकों ने अडिगा की किताब पढ़ी है, उनके लिए यही तुलना सबसे काम की है: फिल्म उपन्यास का दृश्य-दर-दृश्य दोहराव नहीं, बल्कि उसी मूल संघर्ष का कसा हुआ स्क्रीन रूपांतरण है।

लास्ट मैन इन टावर OTT रिलीज़
फिलहाल लास्ट मैन इन टावर की OTT रिलीज़ डेट की कोई पुष्टि नहीं हुई है।
OTT स्टेटस — आखिरी बार जांचा गया: 16 सितंबर 2026
JustWatch पर यह फिल्म अभी भारत में केवल थिएटर में देखने के लिए लिस्टेड है और वहां कोई ऑनलाइन स्ट्रीमिंग विकल्प नहीं मिला है। प्लेटफॉर्म यह भी बताता है कि स्ट्रीमिंग रिलीज़ की तारीख अभी घोषित नहीं की गई है।
जैसे ही निर्माता या कोई स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म डिजिटल रिलीज़ का ऐलान करेगा, यह जानकारी बदल सकती है।
लास्ट मैन इन टावर कहां देखें
लास्ट मैन इन टावर इस समय भारतीय सिनेमाघरों में लगी है। शो टाइमिंग हर शहर में अलग है, इसलिए दर्शक अपने नज़दीकी सिनेमा हॉल या टिकट बुकिंग प्लेटफॉर्म पर उपलब्धता ज़रूर देख लें।
लास्ट मैन इन टावर: हमारा निष्कर्ष
इस लास्ट मैन इन टावर रिव्यू का सार यह है कि फिल्म को लेकर शुरुआती आलोचनात्मक चर्चा मनोज बाजपेयी के अभिनय, रीडेवलपमेंट के विवाद और अरविंद अडिगा के उपन्यास के रूपांतरण के आसपास केंद्रित है।
फिल्म का रनटाइम अपेक्षाकृत छोटा है, इसलिए इसका नज़रिया मूल उपन्यास के विस्तृत साहित्यिक फलक के मुकाबले ज़्यादा सधा हुआ है। यही कारण है कि रूपांतरण किन बातों को उभारता है, यह समझने में फिल्म और किताब का रिश्ता खास मायने रखता है।
कुल मिलाकर लास्ट मैन इन टावर एक हिंदी सोशल ड्रामा के रूप में सामने आती है, जिसकी धुरी एक रिहायशी रीडेवलपमेंट विवाद है। शुरुआती प्रतिक्रियाओं में इसकी कास्ट और स्रोत उपन्यास ही दिलचस्पी की दो सबसे बड़ी वजहें बनकर उभरे हैं।
लास्ट मैन इन टावर से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
क्या लास्ट मैन इन टावर सच्ची घटना पर आधारित है?
नहीं। लास्ट मैन इन टावर एक काल्पनिक फिल्म है, जो अरविंद अडिगा के 2011 में प्रकाशित इसी नाम के उपन्यास से रूपांतरित की गई है।
लास्ट मैन इन टावर में मास्टरजी का किरदार कौन निभा रहा है?
मनोज बाजपेयी ने मास्टरजी की भूमिका निभाई है, जो कहानी के केंद्र में मौजूद रिटायर्ड स्कूल टीचर हैं।
क्या लास्ट मैन इन टावर OTT पर उपलब्ध है?
अभी नहीं। 16 सितंबर 2026 तक JustWatch पर न तो इस फिल्म का कोई ऑनलाइन स्ट्रीमिंग विकल्प दिख रहा है और न ही स्ट्रीमिंग रिलीज़ की कोई पक्की तारीख।
लास्ट मैन इन टावर किस बारे में है?
यह फिल्म रिटायर्ड शिक्षक मास्टरजी की कहानी है, जिनका रीडेवलपमेंट प्रस्ताव को न मानना उन्हें पड़ोसियों और प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने में जुटे लोगों के खिलाफ खड़ा कर देता है।
क्या लास्ट मैन इन टावर अभी सिनेमाघरों में चल रही है?
हां। मौजूदा लिस्टिंग के अनुसार फिल्म भारतीय सिनेमाघरों में दिखाई जा रही है, हालांकि इसकी उपलब्धता शहर और थिएटर पर निर्भर करती है।




