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कुछ किरदार फिल्म खत्म होने के बरसों बाद भी दर्शकों के दिल में बसे रहते हैं, और शिवम पंडित (Shivam Pandit) उन्हीं में से एक है। लगभग दो दशक पहले आवारापन (Awarapan) ने इमरान हाशमी (Emraan Hashmi) को एक ऐसे बेचैन इंसान के रूप में पेश किया था, जो अपराध, प्यार और प्रायश्चित के बीच फंसा था। अब वही किरदार आवारापन 2 (Awarapan 2) में लौट आया है। इस आवारापन 2 रिव्यू में हम देखेंगे कि नितिन कक्कड़ (Nitin Kakkar) के निर्देशन में बना यह सीक्वल कैसा है। फिल्म में हाशमी फिर से शिवम बने हैं, जबकि दिशा पटानी (Disha Patani) ज़ारा और शबाना आज़मी (Shabana Azmi) नफ़ीसा के किरदार में नज़र आती हैं। फिल्म 14 अगस्त 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज़ हुई।
शिवम की वापसी मायने रखती है, क्योंकि आवारापन को कभी सिर्फ़ एक गैंगस्टर फिल्म के तौर पर याद नहीं किया गया। कहानी के केंद्र में शिवम का भावनात्मक संघर्ष था। उसके फ़ैसलों ने धीरे-धीरे उसे हिंसा में डूबे एक आदमी से ऐसा इंसान बना दिया, जो किसी और के लिए अपना सब कुछ कुर्बान करने को तैयार था। दूसरा भाग उसी इतिहास को नींव बनाता है, पर शिवम को एक बिल्कुल नए हालात में खड़ा कर देता है।
सीक्वल की कहानी एक बार फिर अपराध, प्यार, प्रायश्चित और त्याग को आपस में जोड़ती है। किसी अनजान नायक को सामने लाने के बजाय फिल्म शिवम का सफ़र ही आगे बढ़ाती है और पूछती है कि जो आदमी पहले ही दर्दनाक नुकसान झेल चुका हो, उसे दोबारा खतरनाक दुनिया में खींच लिया जाए तो क्या होगा।
आवारापन के बाद शिवम के साथ क्या हुआ?
पहली आवारापन ने शिवम की कहानी को एक दुखद मोड़ पर छोड़ा था। वह एक गैंगस्टर था, जिसकी ज़िंदगी पर आलिया (Aaliyah) का गहरा असर पड़ा था। यह भूमिका श्रिया सरन (Shriya Saran) ने निभाई थी। जुर्म की दुनिया में उसकी भागीदारी उसे उस मोड़ तक ले आई, जहां उसे हुक्म मानने और अपने हिसाब से सही काम करने के बीच चुनाव करना पड़ा। आखिरकार उसका सफ़र त्याग और प्रायश्चित की दास्तान बन गया।
उस अंत ने कहानी को एक तरह की पूर्णता दी थी, इसीलिए सीक्वल का बनना अपने आप में दिलचस्प है। आवारापन 2 उस क्लाइमैक्स को भुलाती नहीं है; बल्कि शिवम के पुराने अनुभवों को उसकी मौजूदा शख्सियत का हिस्सा मानकर चलती है।
नई कहानी उसे फिर से अपराध की दुनिया में ले आती है, जहां एक और मुश्किल अध्याय शुरू होता है। अतीत अब भी उसके फ़ैसलों पर असर डालता है, लेकिन इस बार उसके आसपास के लोग और परिस्थितियां बदल चुकी हैं।
| मूल फिल्म | सीक्वल |
|---|---|
| शिवम का पहला सफ़र | शिवम का अगला अध्याय |
| आलिया का प्रभाव | ज़ारा की मौजूदगी |
| अपराध और प्रायश्चित | अपराध, एक्शन और प्रायश्चित |
| त्याग | नए फ़ैसले और उनके नतीजे |
उन्नीस साल का फासला सीक्वल को शिवम को ज़्यादा परिपक्व रूप में दिखाने का मौका देता है। वह खोने का दर्द जान चुका है और अपने फ़ैसलों की कीमत समझता है। अब असली चुनौती यह है कि क्या यह अनुभव उसे बेहतर राह चुनने में मदद करेगा या उसे फिर उसी दुष्चक्र में धकेल देगा।

नई हमसफ़र, पुरानी जंग
दिशा पटानी की ज़ारा आवारापन 2 के सबसे अहम नए पहलुओं में से एक है। यह किरदार शिवम को ऐसा रिश्ता देता है जो उसके वर्तमान से जुड़ा है, जबकि आलिया उस अतीत का अहम हिस्सा बनी रहती है जिसने उसे गढ़ा।
यही फर्क सीक्वल को अपनी अलग भावनात्मक दिशा देता है। ज़ारा का इस्तेमाल महज़ शिवम और आलिया के रिश्ते को दोहराने के लिए नहीं किया गया। वह शिवम की ज़िंदगी में तब आती है, जब वह प्यार, जुदाई और कुर्बानी सब देख चुका है, यानी इस रिश्ते तक पहुंचने वाला शिवम अब पहले जैसा इंसान नहीं रहा।
प्रमोशनल सामग्री में ज़ारा से जुड़ी कई बातें छिपाकर रखी गई हैं, फिर भी इतना साफ़ है कि वह शिवम के नए सफ़र की अहम कड़ी है। दोनों का रिश्ता मुख्य टकराव के साथ-साथ आगे बढ़ता है और कहानी के रोमांटिक पक्ष को जुर्म की दुनिया में लौटे शिवम के इर्द-गिर्द मंडराते खतरे से जोड़ देता है।
ज़ारा शिवम की कहानी में क्या जोड़ती है
- एक नया भावनात्मक जुड़ाव, जो उसके आज से जुड़ा है
- निजी दांव, जो उसके हर चुनाव को कठिन बना देते हैं
- रोमांस और मुख्य संघर्ष के बीच की कड़ी
- शिवम को उसकी आपराधिक पहचान से आगे देखने का मौका
जब कहानी ज़ारा को सीधे शिवम की आपराधिक ज़िंदगी के जोखिमों के सामने ला खड़ा करती है, तब उसकी भूमिका और भी सार्थक हो जाती है। इस तरह उनका रिश्ता कोई अलग-थलग रोमांटिक सबप्लॉट नहीं रहता, बल्कि एक्शन में निजी परिणाम जोड़ देता है।
जब प्रायश्चित फिर से शिवम को ढूंढ लेता है
शिवम के किरदार से जुड़ा सबसे बड़ा विचार आज भी प्रायश्चित ही है। सीक्वल का आधिकारिक प्रीमाइस भी प्रायश्चित, प्यार और त्याग को उसके सफ़र के केंद्र में रखता है।
विडंबना यह है कि जिस आपराधिक दुनिया से शिवम ने कभी निकलने की कोशिश की थी, वह फिर से उसी से घिरा है। उसे पता है कि हिंसा ने उससे क्या-क्या छीना, फिर भी हालात उसे दोबारा कड़े फ़ैसलों की ओर धकेलते हैं।
इसलिए शिवम की लड़ाई असल में निजी है: चारों तरफ़ का खतरा उसे यह तय करने पर मजबूर करता है कि वह किस हद तक जा सकता है, ताकि पहले कमाया हुआ प्रायश्चित का एहसास हाथ से न फिसले।
उसके द्वंद्व को चार ताकतों के ज़रिए समझा जा सकता है:
अतीत: जो कुछ पहले घटा, वह आज भी शिवम को आकार देता है।
वर्तमान: ज़ारा और नई परिस्थितियां उस पर ताज़ा ज़िम्मेदारियां डालती हैं।
खतरा: जुर्म की राह पर लौटना उसकी जान और रिश्तों, दोनों को दांव पर लगा देता है।
चुनाव: शिवम को तय करना है कि वह क्या कुर्बान करने को तैयार है।
यही भावनात्मक कशमकश आवारापन 2 को सिर्फ़ पुरानी यादों से आगे ले जाकर अपने होने की वजह देती है। फिल्म एक जाने-पहचाने किरदार को लौटाती है, मगर उसके सामने अलग हालात रखती है और यह मौका भी देती है कि वह अपनी ज़िंदगी की दिशा खुद तय करे।
वे लोग जो शिवम और उसके अतीत के बीच खड़े हैं
शिवम भले ही आवारापन 2 का केंद्रीय किरदार हो, पर उसका नया सफ़र उन लोगों से तय होता है जो उसकी ज़िंदगी में अलग-अलग तरह का दबाव लेकर आते हैं। सीक्वल में दिशा पटानी ज़ारा और शबाना आज़मी नफ़ीसा बनकर आती हैं, जबकि सहायक कलाकार शिवम के आसपास की दुनिया को और फैलाते हैं। इससे पहली फिल्म के रिश्तों को दोबारा गढ़ने के बजाय किरदारों का एक नया समीकरण बनता है।
फिल्म का आधार शिवम को एक बार फिर आपराधिक दुनिया के भीतर रखता है, लेकिन उसके फ़ैसले आसपास के लोगों से प्रभावित होते हैं। मतलब, सहायक किरदार केवल प्लॉट को आगे खिसकाने के लिए नहीं हैं; वे यह भी उजागर करते हैं कि पहली फिल्म के तमाम अनुभवों के बाद शिवम कैसा इंसान बन चुका है।
शबाना आज़मी की निभाई नफ़ीसा शिवम के नए संघर्ष में एक बड़ा खतरा बनकर उभरती है। ज़ारा से शिवम का नाता मुख्य रूप से दिल का है, पर नफ़ीसा कहानी के स्याह पक्ष से जुड़ी है और जुर्म की दुनिया में लौटते शिवम पर दबाव का एक और स्रोत बन जाती है।
उसकी मौजूदगी सीक्वल को अलग किस्म का विरोध देती है। हिंसा शिवम के लिए नई नहीं, लेकिन टकराव में नफ़ीसा की जगह एक और रुकावट खड़ी करती है, जिससे उसे अपने निजी फ़ैसलों से जूझते हुए भी पार पाना है।
| किरदार | कलाकार | अहमियत |
|---|---|---|
| शिवम | इमरान हाशमी | मुख्य नायक |
| ज़ारा | दिशा पटानी | नया भावनात्मक जुड़ाव |
| नफ़ीसा | शबाना आज़मी | मुख्य विरोधी ताकत |
| रॉनी (Ronnie) | सलिल आचार्य (Salil Acharya) | बड़ी कहानी से जुड़ाव |
सहायक किरदार शिवम के वर्तमान को उसकी अपनी पहचान देते हैं। उसका बर्ताव अब भी अतीत से समझ आता है, लेकिन ज़ारा, नफ़ीसा और बाकी चेहरे वे दबाव पैदा करते हैं जिन पर नई कहानी चलती है।

सीक्वल के भीतर ज़िंदा है आवारापन की विरासत
आवारापन 2 के सामने सबसे बड़ी चुनौती उस फिल्म की विरासत को उठाने की है, जिसे दर्शक बरसों से याद करते आए हैं, और वह भी उसे दोहराए बिना।
मूल आवारापन अपनी भावुक कहानी और संगीत की वजह से खास तौर पर यादगार बनी। “तो फिर आओ” (Toh Phir Aao) और “तेरा मेरा रिश्ता” (Tera Mera Rishta) जैसे गाने शिवम के अकेलेपन और आलिया के साथ उसके रिश्ते की पहचान बन गए। आवारापन 2 इन पुराने गानों के नए संस्करणों के ज़रिए वह संगीतमय जुड़ाव बनाए रखती है और साथ में “वे जुनून” (Ve Junoon) समेत नया संगीत भी लाती है। मिथुन (Mithoon) और सईद क़ादरी (Sayeed Quadri) की भागीदारी सीक्वल को मूल फिल्म की संगीत पहचान से और करीब जोड़ देती है।
क्या लौटकर आया है:
- शिवम के रूप में इमरान हाशमी
- अपराध जगत की पृष्ठभूमि
- प्यार और त्याग की थीम
- शिवम की प्रायश्चित की तलाश
- मूल फिल्म से भावनात्मक रिश्ता
क्या बदला है:
- ज़ारा अब शिवम के वर्तमान का हिस्सा है
- नफ़ीसा एक नया खतरा लेकर आती है
- एक्शन का पैमाना बड़ा किया गया है
- जाने-पहचाने गानों के साथ नया म्यूज़िक जुड़ा है
- शिवम अपनी ज़िंदगी के एक अलग पड़ाव पर है
सीक्वल को यह साबित करना है कि परिचित चीज़ें एक नई कहानी की सेवा कर सकती हैं। शिवम, संगीत और थीम इसे पहली फिल्म से जोड़ते हैं, जबकि ज़ारा, नफ़ीसा और बड़ा टकराव इस अध्याय को अलग पहचान देते हैं।
आखिर, शिवम का अतीत तो पहले ही परदे पर कहा जा चुका है। आवारापन 2 का असली मकसद यह खोजना है कि उस अतीत से बने इंसान को जब अपना भविष्य चुनने का एक और मौका मिलता है, तब क्या होता है।
रोमांस से एक्शन तक: आवारापन 2 ने कहानी को कैसे फैलाया
पहली आवारापन में नायक के इर्द-गिर्द अपराध और हिंसा तो थी, लेकिन उसकी सबसे बड़ी ताकत शिवम का भावनात्मक सफ़र था। आवारापन 2 उसी नींव पर एक ज़्यादा एक्शन-प्रधान कहानी खड़ी करती है। रोमांस और ड्रामा के तत्व अब भी मौजूद हैं, पर शिवम अब ऐसे हालात में है जहां ज़िंदा बचना, वफ़ादारी और आमने-सामने की भिड़ंत कहीं ज़्यादा अहम हो जाती है।
एक्शन का बढ़ा हुआ हिस्सा कहानी का कैनवास बड़ा कर देता है, फिर भी शिवम सबसे दिलचस्प तब लगता है जब टकराव उसकी भावनाओं और निजी चुनावों से जुड़ा हो।
इस बार क्या अलग महसूस होता है?
- शिवम के नए संघर्ष के इर्द-गिर्द ज़्यादा दमदार एक्शन
- ज़ारा के ज़रिए नया रोमांटिक रिश्ता
- नफ़ीसा के रूप में एक अलग खलनायक
- नायक के आसपास एक बड़ी दुनिया
- प्यार, त्याग और प्रायश्चित की वही भावनात्मक बुनियाद
दर्शक के नज़रिए से एक्शन की ओर यह झुकाव मौका भी है और जोखिम भी। बड़ा एक्शन शिवम की वापसी को ताज़गी दे सकता है, पर इससे वह भावनात्मक नज़दीकी कम भी हो सकती है जिसने मूल फिल्म को यादगार बनाया था। फिल्म तब सबसे बेहतर काम करती है जब उसके एक्शन सीन सिर्फ़ तमाशा बढ़ाने के बजाय शिवम के बारे में कुछ नया बताते हैं।
यही संतुलन आवारापन 2 को अपनी पहचान देता है और फ्रेंचाइज़ी के भावनात्मक मिज़ाज को भी ज़िंदा रखता है।
ट्रेलर में छिपे कहानी के बड़े संकेत
आवारापन 2 का प्रमोशन मुख्य रूप से शिवम पंडित की वापसी पर टिका रहा। उन्नीस साल बाद इमरान हाशमी को उसी रोल में देखना स्वाभाविक रूप से सबसे बड़ा आकर्षण है, लेकिन टीज़र और ट्रेलर यह भी बता देते हैं कि यह उसकी ज़िंदगी का एक अलग अध्याय है।
फुटेज में शिवम एक ज़्यादा अंधेरे और एक्शन से भरे माहौल में दिखता है। इसमें भिड़ंत, खतरा और ज़ारा के साथ के पल हैं, जबकि शबाना आज़मी की नफ़ीसा टकराव में एक और परत जोड़ती है। साथ ही, संगीत और शिवम के संयमित व्यक्तित्व के ज़रिए मूल फिल्म वाला भावनात्मक सुर भी झलकता रहता है।
हर बड़ा मोड़ उजागर करने के बजाय प्रमोशनल सामग्री दर्शकों को कहानी की दिशा के कुछ सुराग थमाती है।
किन बातों पर ध्यान दें
शिवम की वापसी: किरदार पहले से ज़्यादा परिपक्व दिखता है, पर उसकी तीव्रता वैसी ही जानी-पहचानी है।
ज़ारा की मौजूदगी: शिवम से उसका रिश्ता नई कहानी के भावुक पहलू से गहराई से जुड़ा लगता है।
नफ़ीसा की भूमिका: शबाना आज़मी का किरदार खतरे का एक बड़ा स्रोत है।
एक्शन: सीक्वल में शारीरिक टकराव का दायरा साफ़ तौर पर बढ़ा है।
नॉस्टैल्जिया: परिचित माहौल और संगीत के संदर्भ नई फिल्म को आवारापन से जोड़ते हैं।
पुराने दर्शक शिवम का इतिहास पहले से जानते हैं। ज़्यादा दिलचस्प सवाल यह है कि उसे इस खतरनाक दुनिया में दोबारा कौन-सी चीज़ खींच लाई और इस बार वह क्या-क्या दांव पर लगाने को तैयार है।

कल्ट फॉलोइंग वाले सीक्वल पर नितिन कक्कड़ का नज़रिया
जिस फ्रेंचाइज़ी से दर्शकों की इतनी गहरी भावनात्मक यादें जुड़ी हों, उसकी कमान संभालना कभी आसान नहीं होता। मूल आवारापन का निर्देशन मोहित सूरी (Mohit Suri) ने किया था, जबकि आवारापन 2 को नितिन कक्कड़ ने डायरेक्ट किया है। उनका काम था शिवम की भावनात्मक दुनिया को बचाए रखते हुए सीक्वल को आज के दौर का एक्शन-थ्रिलर ट्रीटमेंट देना।
नतीजा एक ऐसी फिल्म है जो क्राइम, एक्शन, रोमांस और ड्रामा के बीच आवाजाही करती है। शिवम भावनाओं का केंद्र बना रहता है, मगर उसके चारों ओर का पैमाना बड़ा है। एक्शन का विस्तार और इमरान हाशमी की स्क्रीन प्रेज़ेंस इसकी साफ़ दिखने वाली खूबियों में शामिल हैं, हालांकि इसका भावनात्मक असर मूल फिल्म में शिवम और आलिया के रिश्ते की ऊंचाई तक लगातार नहीं पहुंच पाता।
इसलिए सीक्वल की असली परीक्षा यह नहीं कि वह पहली फिल्म से बड़ी दिखती है या नहीं, बल्कि यह कि नया पैमाना शिवम के किरदार के काम आता है या नहीं। अगर एक्शन उसके रिश्तों और नैतिक फ़ैसलों से जुड़ा रहे, तो विस्तार जायज़ लगता है। अगर ये भावनात्मक दांव पीछे छूट जाएं, तो फिल्म एक जाने-पहचाने चेहरे वाली आम एक्शन थ्रिलर बनकर रह जाने का खतरा उठाती है।
फिल्म देखने से पहले यह फर्क याद रखना ठीक रहेगा। आवारापन 2 साल 2007 की मूवी के हर तत्व को दोबारा रचने की कोशिश नहीं कर रही।
इसका तरीका इन बातों पर टिका है:
परिचय — शिवम और फ्रेंचाइज़ी की संगीतमय पहचान की वापसी।
विस्तार — किरदार को एक बड़ा, एक्शन से चलने वाला संघर्ष देना।
नए रिश्ते — ज़ारा और नफ़ीसा का आगमन।
निरंतरता — मूल फिल्म की घटनाओं की अहमियत को बरकरार रखना।
कक्कड़ का अंदाज़ शिवम को पहचानने लायक रखते हुए सीक्वल को बड़े एक्शन-थ्रिलर फॉर्मेट की ओर मोड़ देता है।
आवारापन 2 रिव्यू: क्या जमता है, क्या अलग लगता है और किसे देखनी चाहिए
आवारापन 2 की सबसे बड़ी ताकत अब भी शिवम पंडित के रूप में इमरान हाशमी हैं। उनकी वापसी फिल्म को फौरन मूल कहानी से जोड़ देती है, जबकि बड़ा एक्शन और परिचित संगीत सीक्वल की व्यावसायिक अपील बनाने में मदद करते हैं।
संगीत और बड़े विज़ुअल स्केल का फ़ायदा भी फिल्म को मिलता है। वहीं कुछ समीक्षाओं में कहा गया है कि नए रोमांटिक रिश्ते में हर बार वह भावनात्मक गहराई नहीं दिखती, जो मूल फिल्म में शिवम और आलिया के बीच थी। सेकंड हाफ़ और कुछ सहायक किरदारों को भी मिली-जुली प्रतिक्रिया मिली है।
लिहाज़ा, इस फिल्म का आनंद तब ज़्यादा आता है जब इसे पहली आवारापन के भावनात्मक अनुभव को हूबहू दोहराने की कोशिश के बजाय एक्शन-प्रधान पहचान वाली कड़ी के तौर पर परखा जाए।
क्या अच्छा है
- इमरान हाशमी की वापसी शिवम को निरंतरता देती है।
- एक्शन सीक्वेंस सीक्वल को बड़ा कैनवास देते हैं।
- संगीत दर्शकों को मूल फिल्म से फिर जोड़ता है।
- ज़ारा और नफ़ीसा किरदारों के नए समीकरण गढ़ती हैं।
- पुरानी यादें लंबे समय से जुड़े फैंस के लिए भावनात्मक मूल्य जोड़ती हैं।

किसे देखनी चाहिए?
आवारापन 2 स्वाभाविक रूप से मूल फिल्म के प्रशंसकों, इमरान हाशमी के चाहने वालों और उन दर्शकों के लिए है जिन्हें एक्शन, रोमांस, क्राइम और इमोशनल ड्रामा का मेल पसंद है।
इसे पहली फिल्म का हूबहू अनुभव दोहराने वाली कोशिश मानने के बजाय शिवम की ज़िंदगी का नया पन्ना समझकर देखना ज़्यादा बेहतर रहेगा।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
1. क्या आवारापन 2 सीधे आवारापन का सीक्वल है?
हां। फिल्म शिवम पंडित का सफ़र आगे बढ़ाती है, वही किरदार जिसे इमरान हाशमी ने मूल आवारापन में निभाया था।
2. आवारापन 2 में शिवम पंडित का रोल कौन निभा रहा है?
इमरान हाशमी पहली फिल्म के लगभग दो दशक बाद शिवम पंडित के रूप में लौटे हैं।
3. आवारापन 2 में ज़ारा कौन बनी हैं?
दिशा पटानी ज़ारा की भूमिका में हैं, जो नई लीड एक्ट्रेस हैं और जिनका किरदार शिवम के नए सफ़र से जुड़ता है।
4. आवारापन 2 में नफ़ीसा का किरदार किसने निभाया है?
शबाना आज़मी नफ़ीसा बनी हैं, जो शिवम के इर्द-गिर्द चल रहे टकराव से जुड़ा एक अहम किरदार है।
5. आवारापन 2 के डायरेक्टर कौन हैं?
इस सीक्वल का निर्देशन नितिन कक्कड़ ने किया है।
6. आवारापन 2 कब रिलीज़ हुई?
यह मूवी 14 अगस्त 2026 को थिएटर्स में रिलीज़ हुई।
7. क्या आवारापन 2 में पहली फिल्म के गाने हैं?
हां। सीक्वल मूल फिल्म से संगीत का रिश्ता कायम रखता है, जिसमें “तो फिर आओ“ और “तेरा मेरा रिश्ता“ के नए वर्ज़न के साथ नए गाने भी शामिल हैं।
8. क्या आवारापन 2 में आलिया है?
आलिया शिवम के अतीत और भावनात्मक इतिहास का अहम हिस्सा बनी रहती है, जबकि सीक्वल में ज़ारा को नई महिला किरदार के रूप में पेश किया गया है।
9. क्या आवारापन 2 देखने लायक है?
मूल फिल्म, इमरान हाशमी और रोमांटिक एक्शन ड्रामा के शौकीनों के लिए यह सीक्वल एक्शन, रोमांस, क्राइम, संगीत और नॉस्टैल्जिया का मिश्रण पेश करता है। इसे रीमेक के बजाय शिवम की कहानी के अगले अध्याय की तरह देखें।
अंतिम फ़ैसला
आवारापन 2 तब सबसे अच्छी लगती है जब वह मूल फिल्म का भावनात्मक फॉर्मूला दोहराने के बजाय शिवम को एक उम्रदराज़ किरदार के रूप में नए संघर्ष से जूझते दिखाती है। फ्रेंचाइज़ी से फिल्म की सबसे मज़बूत कड़ी इमरान हाशमी ही हैं, जबकि विस्तृत एक्शन, ज़ारा की भूमिका और लौटी हुई संगीत पहचान सीक्वल को अपनी राह देती है।
हो सकता है यह फिल्म 2007 वाली मूल फिल्म जितना भावनात्मक असर न छोड़े, खासकर उन दर्शकों पर जो शिवम और आलिया से गहराई से जुड़े थे। फिर भी यह पूरी तरह नॉस्टैल्जिया के भरोसे रहने के बजाय किरदार को एक सार्थक विस्तार देती है।
मूवीमेनिया एडिटोरियल रेटिंग: 3.5/5
आखिरी बात: हमारे आवारापन 2 रिव्यू का निचोड़ यह है कि यह फिल्म शिवम की दास्तान का नया पड़ाव है, जो लीड परफॉर्मेंस, एक्शन और मूल फिल्म से जुड़ाव में सबसे दमदार है, लेकिन जिस फिल्म से यह सिलसिला शुरू हुआ था, उसके मुकाबले भावनात्मक रूप से कुछ कमज़ोर पड़ती है।




