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वेलकम टू द जंगल रिव्यू: एक्शन, कॉमेडी और एडवेंचर का बड़ा धमाका

वेलकम टू द जंगल एक्शन, कॉमेडी और एडवेंचर से भरा मल्टीस्टारर एंटरटेनर है। पढ़ें कहानी, परफॉर्मेंस, कमियों और 4.0/5 रेटिंग वाला पूरा रिव्यू।

इस लेख में18 sections
  1. फिल्म की पूरी जानकारी (Movie Overview)
  2. एक नज़र में खास बातें
  3. वेलकम टू द जंगल की कहानी
  4. फर्स्ट हाफ रिव्यू
  5. कहानी क्यों है ख़ास
  6. स्टारकास्ट की परफॉर्मेंस
  7. डायरेक्शन और स्क्रीनप्ले
  8. कॉमेडी, जो फिल्म की जान है
  9. एक्शन और एडवेंचर
  10. सिनेमैटोग्राफी और विज़ुअल अनुभव
  11. म्यूज़िक और बैकग्राउंड स्कोर
  12. टेक्निकल पहलू: क्या रहा दमदार
  13. फिल्म में क्या अच्छा है
  14. कहां रह गई कमी
  15. किसे देखनी चाहिए वेलकम टू द जंगल?
  16. वेलकम टू द जंगल क्यों देखें
  17. फाइनल वर्डिक्ट: वेलकम टू द जंगल रिव्यू
  18. अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

यह लेख अंग्रेज़ी में भी उपलब्ध है — Read this article in English

वेलकम टू द जंगल रिव्यू की शुरुआत उसी बात से करते हैं जिसके लिए यह फ्रेंचाइज़ी जानी जाती है—भरपूर हंसी और बड़ा कमर्शियल मनोरंजन। वेलकम टू द जंगल (Welcome To The Jungle) इसी परंपरा को आगे बढ़ाती है, लेकिन इस बार कहानी को घने जंगल की रोमांचक पृष्ठभूमि, तेज़ रफ़्तार एक्शन और कलाकारों की बड़ी टोली के साथ पेश किया गया है। फिल्म का मकसद साफ है: हास्य, सस्पेंस और ठेठ बॉलीवुड अंदाज़ की कहानी के मेल से दर्शकों का भरपूर मनोरंजन करना।

आम कॉमेडी फिल्मों से अलग, यह फिल्म एक अनोखे आइडिया से शुरू होती है जो जल्द ही एक अनिश्चित एडवेंचर में बदल जाता है। कहानी जैसे-जैसे आगे बढ़ती है, हर किरदार ऐसी मुसीबतों में फंसता चला जाता है जिनकी उसने कभी कल्पना भी नहीं की थी। यही वजह है कि कथानक ताज़ा बना रहता है और दर्शकों के पास आख़िर तक सीट से चिपके रहने की पूरी वजह होती है।


फिल्म की पूरी जानकारी (Movie Overview)

विवरणजानकारी
फिल्म का नामवेलकम टू द जंगल (Welcome To The Jungle)
जॉनरएक्शन, कॉमेडी, एडवेंचर
भाषाहिंदी
रनटाइम2 घंटे 45 मिनट
रिलीज़ डेट25 जून 2026
सर्टिफिकेटUA16+

एक नज़र में खास बातें

  • एक ही पैकेज में एक्शन, कॉमेडी और एडवेंचर का तड़का।
  • अनोखी कहानी, जिसमें कदम-कदम पर अप्रत्याशित ट्विस्ट हैं।
  • कई मज़ेदार किरदारों से सजी बड़ी स्टारकास्ट।
  • जंगल की लोकेशन कहानी में नयापन लेकर आती है।
  • पूरे परिवार के लिए बना कमर्शियल एंटरटेनर।

वेलकम टू द जंगल की कहानी

कहानी की शुरुआत अमीर कारोबारी सिन्हा से होती है, जिसे डर है कि उसकी छिपी हुई दौलत आगे चलकर उसे कानूनी पचड़ों में फंसा सकती है। किसी की नज़र में आने से बचने और अपनी आर्थिक उलझन सुलझाने के लिए वह एक अजीबोगरीब तरकीब निकालता है। वह जानबूझकर एक ऐसी फिल्म में पैसा लगाने का फैसला करता है जिसके बारे में उसे पूरा यकीन है कि वह बॉक्स ऑफिस पर औंधे मुंह गिरेगी, ताकि उस घाटे के सहारे उसका छिपा पैसा जायज़ दिखने लगे।

अपनी योजना को कामयाब बनाने के लिए सिन्हा दो संघर्षरत निर्देशकों, देव और दास, के साथ-साथ राजीव कोहली नाम के एक ढलते सितारे को काम पर रखता है। उसका मानना है कि इन तीनों का नाकाम करियर प्रोजेक्ट के फ्लॉप होने की गारंटी है। लेकिन हालात तब पलट जाते हैं जब निर्देशकों के कर्ज़ के चलते ख़तरनाक गैंगस्टर ज़बरदस्ती इस प्रोडक्शन में घुस आते हैं।

आख़िरकार पूरी फिल्म यूनिट शूटिंग के लिए एक दूरदराज़ के घने जंगल में पहुंचती है। जो काम एक नकली फिल्म प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू हुआ था, वह जल्द ही अपराधियों, सैन्य ऑपरेशनों, छिपे इरादों और हंसा देने वाली गलतफहमियों से भरे ख़तरनाक सफ़र में तब्दील हो जाता है। अफरा-तफरी बढ़ने के साथ किरदारों को ज़िंदा बचने के लिए मिलकर काम करना पड़ता है, और इसी दौरान ऐसे राज़ खुलते हैं जो उनके सफ़र की दिशा ही बदल देते हैं।

बड़े स्पॉइलर दिए बिना इतना कहा जा सकता है कि क्लाइमैक्स एक्शन, कॉमेडी और टीमवर्क का संतोषजनक मेल पेश करता है। मज़े की बात यह है कि जिस फिल्म को सबसे बड़ी फ्लॉप बनाने के इरादे से बनाया गया था, वही सबकी ज़िंदगी को अनपेक्षित तरीकों से बदल देती है।


फर्स्ट हाफ रिव्यू

पहला हाफ किरदारों से परिचय कराने और कहानी के अनोखे आधार को मज़बूती से स्थापित करने पर टिका है। स्क्रीनप्ले एक संतुलित रफ़्तार से चलता है और मज़ाकिया पलों के साथ दिलचस्प प्लॉट डेवलपमेंट को अच्छी तरह साधता है। फिल्म सीधे जंगल वाले एडवेंचर में छलांग नहीं लगाती, बल्कि पहले अपने मूल आइडिया और पात्रों को ठीक से गढ़ने में वक्त देती है। यही सधा हुआ तरीका उत्सुकता बढ़ाता है और आगे के रोमांच की ओर बदलाव को ज़्यादा मज़ेदार बना देता है।

इंटरवल बिल्कुल सही मोड़ पर आता है और दर्शक यह जानने को बेताब रहते हैं कि आगे क्या होगा। हास्य, सस्पेंस और रोमांच का यह मिश्रण शुरुआती हिस्से में इतनी गति भर देता है कि दर्शकों का ध्यान कहीं भटकता नहीं।


कहानी क्यों है ख़ास

  • एक कारोबारी खुद चाहता है कि उसकी अपनी फिल्म बुरी तरह पिट जाए।
  • एक फर्ज़ी फिल्म शूट असली सर्वाइवल मिशन बन जाता है।
  • हंसी ज़बरदस्ती के चुटकुलों से नहीं, बल्कि परिस्थितियों से पैदा होती है।
  • जंगल का माहौल एडवेंचर और सस्पेंस दोनों रचता है।
  • हर अहम किरदार का कोई छिपा मकसद है, जो कहानी को आकार देता है।
वेलकम टू द जंगल रिव्यू - कॉमेडी एडवेंचर फिल्म का दृश्य
वेलकम टू द जंगल: जंगल में फंसी फिल्म यूनिट की कॉमेडी भरी मुश्किलें

स्टारकास्ट की परफॉर्मेंस

वेलकम टू द जंगल की सबसे बड़ी ताकतों में से एक इसकी दमदार मल्टीस्टारर कास्ट है। इतने सारे किरदारों को संभालना कभी आसान नहीं होता, फिर भी फिल्म हर बड़े रोल को इतना स्क्रीन स्पेस देती है कि वह अपनी छाप छोड़ सके। कहानी किसी एक हीरो के कंधों पर नहीं टिकी है। इसके बजाय कई पात्रों को यादगार पल मिलते हैं, जिससे कथा स्वाभाविक ढंग से एक किरदार से दूसरे पर शिफ्ट होती रहती है और पूरी टोली का संतुलन बना रहता है।

कलाकारों के बीच की केमिस्ट्री कॉमेडी को असरदार बनाने में बड़ी भूमिका निभाती है। उनके एकदम अलग-अलग स्वभाव मज़ेदार गलतफहमियां और मनोरंजक बातचीत पैदा करते हैं, जो कहीं से भी बनावटी नहीं लगतीं। गंभीर हालात में भी इनकी आपसी नोकझोंक फिल्म के हल्के-फुल्के मिज़ाज को बरकरार रखती है।

कई सहायक कलाकार भी अहम योगदान देते हैं। वे सिर्फ़ कॉमिक रिलीफ के लिए मौजूद नहीं हैं, बल्कि उनमें से कई कहानी की दिशा तय करते हैं और एडवेंचर का अहम हिस्सा बन जाते हैं। इस संतुलित नज़रिए की बदौलत पूरी कास्ट एक-दूसरे से जुड़ी हुई महसूस होती है।


डायरेक्शन और स्क्रीनप्ले

बड़ी स्टारकास्ट, कई सबप्लॉट और जंगल का रोमांच—इन सबको एक साथ संभालने के लिए सधे हुए निर्देशन की ज़रूरत होती है। निर्देशक कहानी को ज़रूरत से ज़्यादा उलझाए बिना उसे आगे बढ़ाने में सफल रहते हैं। हर बड़ी घटना अगली घटना से सहज रूप से जुड़ती है, इसलिए दर्शक मुख्य कथा का सिरा कभी नहीं खोते।

स्क्रीनप्ले इस बात के लिए तारीफ़ का हक़दार है कि वह कॉमेडी को एक्शन और सस्पेंस के साथ बखूबी बैलेंस करता है। ज़्यादातर हास्य किरदारों की आपसी बातचीत, अचानक हुई गलतफहमियों और बदलते टकरावों से उपजता है। केवल स्लैपस्टिक गैग्स पर निर्भर रहने के बजाय यह तरीका कॉमेडी में विविधता लाता है और शुरू से अंत तक कहानी कहने के अंदाज़ को दिलचस्प बनाए रखता है।

फिल्म का रनटाइम भले ही थोड़ा लंबा है, लेकिन स्क्रीनप्ले बीच-बीच में इतने नए मोड़ जोड़ता रहता है कि कथा दोहराव भरी नहीं लगती। हर ट्विस्ट किरदारों के सामने नई चुनौती खड़ी करता है और दर्शकों में अंजाम जानने की जिज्ञासा जगाए रखता है।


कॉमेडी, जो फिल्म की जान है

हंसी ही वेलकम टू द जंगल का दिल है, पर इसे चुटीली परिस्थितियों के ज़रिए परोसा गया है, ज़बरदस्ती ठूंसे गए जोक्स के ज़रिए नहीं। जैसे-जैसे किरदार लगातार बिगड़ते हालात से जूझते हैं, हास्य अपने आप पनपता चला जाता है।

फिल्म यूनिट, गैंगस्टरों और बाकी पात्रों के बीच की गलतफहमियां कई यादगार सीन रचती हैं। सबके अलग-अलग और आपस में टकराते लक्ष्य अक्सर ऐसे ठहाकेदार हालात बना देते हैं, जो कहानी की रफ़्तार धीमी किए बिना दर्शकों को गुदगुदाते रहते हैं।

यह फिल्म कॉमेडी को एकरस होने से भी बचाती है। लोकेशन और हालात बदलने के साथ हास्य भी एडवेंचर के साथ-साथ नया रूप लेता है, जिससे पूरी फिल्म में दर्शकों को हर बार कुछ ताज़ा देखने को मिलता है।


एक्शन और एडवेंचर

भले ही कॉमेडी केंद्र में है, लेकिन जब-जब कहानी धीमी पड़ने लगती है, एक्शन सीक्वेंस रोमांच लौटा लाते हैं। पीछा करने वाले दृश्य, अपराधियों से भिड़ंत और जंगल में ज़िंदा बचने की जद्दोजहद दांव ऊंचे करती है, फिर भी फिल्म का मनोरंजक मिज़ाज नहीं बदलता।

यहां जंगल सिर्फ़ शूटिंग की जगह भर नहीं है। यह ऐसी अप्रत्याशित बाधाएं खड़ी करता है जो हर किरदार की परीक्षा लेती हैं और कहानी को अनजाने रास्तों पर ले जाती हैं। यही रोमांचक सेटिंग फिल्म को पारंपरिक कॉमेडी एंटरटेनर्स से अलग खड़ा करती है।

एक्शन और कॉमेडी का यह संगम ख़ास तौर पर इसलिए जमता है क्योंकि कोई भी पहलू दूसरे पर हावी नहीं होता। दोनों जॉनर एक-दूसरे के पूरक बनते हैं और फिल्म की ऊर्जा को लगातार बनाए रखते हैं।


सिनेमैटोग्राफी और विज़ुअल अनुभव

विज़ुअल लिहाज़ से फिल्म जंगल की पृष्ठभूमि का बढ़िया इस्तेमाल करती है। चौड़े लैंडस्केप शॉट्स, घने जंगल, नदियां और सुनसान लोकेशन एडवेंचर को भव्यता देते हैं और माहौल को विश्वसनीय बनाते हैं।

कैमरा जंगल की ख़ूबसूरती और उसके ख़तरे, दोनों को बखूबी कैद करता है। सीन चाहे कॉमेडी का हो या एक्शन का, दृश्य रंगीन और आकर्षक बने रहते हैं। यह मज़बूत विज़ुअल प्रस्तुति सिनेमाई अनुभव को और निखार देती है।

प्रोडक्शन डिज़ाइन भी सराहना का हक़दार है। कॉस्ट्यूम से लेकर शूटिंग लोकेशन तक, हर चीज़ रोमांच भरे माहौल को सहारा देती है और एक जीवंत कमर्शियल एंटरटेनर गढ़ने में मदद करती है।


म्यूज़िक और बैकग्राउंड स्कोर

फिल्म के जोशीले माहौल को बनाए रखने में संगीत की अहम भूमिका है। गाने कहानी में सहजता से घुल-मिल जाते हैं और कथा के प्रवाह को तोड़े बिना मनोरंजक ब्रेक देते हैं।

बैकग्राउंड स्कोर हास्य और सस्पेंस, दोनों तरह के दृश्यों को असरदार ढंग से सपोर्ट करता है। एक्शन सीक्वेंस में संगीत उत्तेजना बढ़ाता है, वहीं हल्के-फुल्के पलों में चंचल धुनें फिल्म के कॉमिक टोन से मेल खाती हैं।

साउंडट्रैक भले ही कहानी पर पूरी तरह छा न जाए, लेकिन यह कुल मनोरंजन मूल्य को पूरा करता है और फिल्म की कमर्शियल अपील में इज़ाफ़ा करता है।


टेक्निकल पहलू: क्या रहा दमदार

ये तकनीकी पहलू पूरे अनुभव को मज़बूती देते हैं:

  • कई कहानियों को साथ लेकर चलने वाला संतुलित स्क्रीनप्ले।
  • प्रभावशाली जंगल लोकेशन और प्रोडक्शन डिज़ाइन।
  • स्मूद एडिटिंग, जो कथा का प्रवाह बनाए रखती है।
  • एक्शन, कॉमेडी और एडवेंचर का असरदार मेल।
  • रंग-बिरंगी सिनेमैटोग्राफी के साथ मज़बूत विज़ुअल प्रेज़ेंटेशन।
  • हर बड़े सीक्वेंस का साथ देने वाला बैकग्राउंड स्कोर।

कुल मिलाकर, तकनीकी टीम एक ऐसा पॉलिश्ड कमर्शियल एंटरटेनर तैयार करने में कामयाब रहती है जो देखने में आकर्षक है और पूरी फिल्म में एक-सी रफ़्तार बनाए रखता है।

वेलकम टू द जंगल - बॉलीवुड एडवेंचर फिल्म रिव्यू
घने जंगल की लोकेशन फिल्म के रोमांच को नई ऊंचाई देती है

फिल्म में क्या अच्छा है

वेलकम टू द जंगल इसलिए कामयाब होती है क्योंकि यह खुद को किसी एक जॉनर तक सीमित नहीं रखती। पारंपरिक कॉमेडी से आगे बढ़कर यह एक्शन, एडवेंचर, सस्पेंस और भावुक पलों को मिलाकर एक संपूर्ण मनोरंजक अनुभव देती है। जॉनर का यही संतुलन कहानी को शुरू से आख़िर तक दिलचस्प रखता है और उसे दोहराव से बचाता है।

दूसरी बड़ी ख़ूबी इसकी एनसेंबल कास्ट है। हर अहम किरदार कहानी में कुछ सार्थक जोड़ता है, जिससे यह सफ़र और भी रोचक बन जाता है। उनके अलग-अलग व्यक्तित्व और छिपे मकसद ऐसे मज़ेदार हालात बनाते हैं जो कहानी को लगातार आगे धकेलते हैं।

जंगल की सेटिंग भी फिल्म की एक बड़ी हाइलाइट है। यह स्क्रीनप्ले में ताज़गी भरती है और रोमांचक एक्शन, हंसाने वाली गलतफहमियों और अनपेक्षित मोड़ों के मौके पैदा करती है। महज़ एक बैकड्रॉप बनने के बजाय यह लोकेशन कहानी कहने का अहम हिस्सा बन जाती है।


कहां रह गई कमी

किसी भी ईमानदार वेलकम टू द जंगल रिव्यू में कमियों का ज़िक्र ज़रूरी है—दिलचस्प कॉन्सेप्ट के बावजूद फिल्म खामियों से अछूती नहीं है। सेकंड हाफ के कुछ दृश्य थोड़े छोटे किए जा सकते थे ताकि रफ़्तार और कसी हुई रहती। कुछ दर्शकों को यह भी लग सकता है कि चंद सहायक किरदारों को ज़्यादा स्क्रीन टाइम मिलना चाहिए था।

बड़ी कास्ट की वजह से कुछ कहानियों को बाकियों के मुकाबले कम तवज्जो मिलती है। हालांकि ये कमियां कुल मनोरंजन पर ख़ास असर नहीं डालतीं। फिल्म का पूरा ध्यान किसी गहरे भावनात्मक ड्रामा के बजाय थिएटर में मज़ेदार अनुभव देने पर टिका रहता है।


किसे देखनी चाहिए वेलकम टू द जंगल?

अगर आपको ऐसे बॉलीवुड कमर्शियल एंटरटेनर पसंद हैं जिनमें कॉमेडी के साथ एक्शन और एडवेंचर भी हो, तो वेलकम टू द जंगल आपको निराश नहीं करेगी। यह फिल्म उन दर्शकों के लिए बनी है जो हल्की-फुल्की कहानी, रंगीन किरदारों और अचानक आने वाले ट्विस्ट का लुत्फ़ उठाते हैं।

फैमिली आउटिंग, वीकेंड मूवी प्लान और मल्टीस्टारर फिल्मों के शौकीनों के लिए भी यह अच्छा विकल्प है। कहानी में सस्पेंस और एक्शन ज़रूर है, फिर भी इसका ओवरऑल टोन मज़ेदार और बड़े दर्शक वर्ग के लिए सहज है।

वेलकम टू द जंगल क्यों देखें

इस फिल्म को मौका देने की कई वजहें हैं। इसमें ताज़ा कॉन्सेप्ट, ऊर्जा से भरी परफॉर्मेंस और रोमांचक सेटिंग है, जो इसे रूटीन कॉमेडी फिल्मों की भीड़ से अलग करती है। हंसी और सस्पेंस के मेल की वजह से परदे पर हर पल कुछ न कुछ घटता रहता है।

कई कमर्शियल फिल्मों के उलट, यह लगातार नई परिस्थितियां सामने लाती है और दर्शकों को अंदाज़ा लगाने पर मजबूर करती है। कॉमेडी हो, एक्शन हो या जंगल का एडवेंचर, हर बड़ा पहलू एक सुखद सिनेमाई अनुभव में योगदान देता है।


फाइनल वर्डिक्ट: वेलकम टू द जंगल रिव्यू

वेलकम टू द जंगल वही परोसती है जिसकी उम्मीद फैंस एक बड़े पैमाने के बॉलीवुड एंटरटेनर से करते हैं। यह कॉमेडी, एडवेंचर, एक्शन और सस्पेंस को एक तेज़ रफ़्तार कहानी में पिरोती है, जो रनटाइम के ज़्यादातर हिस्से में मनोरंजक बनी रहती है। पेसिंग की कुछ छोटी-मोटी दिक्कतों के बावजूद दमदार अभिनय, रोमांचक लोकेशन और मनोरंजक स्क्रीनप्ले इसे देखने लायक बनाते हैं।

फिल्म ज़रूरत से ज़्यादा गंभीर या भावनात्मक रूप से भारी बनने की कोशिश नहीं करती। इसका पूरा फोकस हंसी, सरप्राइज़ और लार्जर-दैन-लाइफ पलों से भरा थिएटर अनुभव देने पर है। दोस्तों या परिवार के साथ वीकेंड पर कोई मज़ेदार फिल्म देखनी हो, तो यह टिकट के पैसे वसूल कराने लायक मनोरंजन देती है।

कैटेगरीरेटिंग
कहानी4.0/5
अभिनय4.2/5
निर्देशन4.0/5
स्क्रीनप्ले4.1/5
कॉमेडी4.3/5
एक्शन4.0/5
म्यूज़िक और बैकग्राउंड स्कोर3.8/5
सिनेमैटोग्राफी4.2/5
एडिटिंग3.9/5
प्रोडक्शन डिज़ाइन4.3/5
एंटरटेनमेंट वैल्यू4.4/5
ओवरऑल रेटिंग4.0/5

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

क्या वेलकम टू द जंगल देखने लायक है?

हां। अगर आपको एडवेंचर, बड़ी स्टारकास्ट और मनोरंजक ट्विस्ट वाली बॉलीवुड एक्शन-कॉमेडी फिल्में पसंद हैं, तो यह फिल्म ज़रूर देखी जा सकती है।

वेलकम टू द जंगल का जॉनर क्या है?

यह फिल्म एक्शन, कॉमेडी और एडवेंचर का मिश्रण है, जिसमें सस्पेंस और सर्वाइवल के तत्व भी शामिल हैं।

क्या यह फिल्म परिवार के साथ देखी जा सकती है?

फिल्म को UA16+ सर्टिफिकेट मिला है। परिवार के साथ देखने का प्लान बनाने से पहले दर्शकों को इस उम्र संबंधी गाइडेंस पर ध्यान देना चाहिए।

फिल्म कितनी लंबी है?

फिल्म का कुल रनटाइम लगभग 2 घंटे 45 मिनट है।

दूसरी कॉमेडी फिल्मों से वेलकम टू द जंगल अलग कैसे है?

इसका अनोखा प्लॉट, जंगल की सेटिंग, मल्टीस्टारर कास्ट और कॉमेडी, एक्शन व सर्वाइवल का कॉम्बिनेशन इसे कई पारंपरिक बॉलीवुड एंटरटेनर्स के मुकाबले एक अलग पहचान देता है।

निष्कर्ष

वेलकम टू द जंगल एक जीवंत एंटरटेनर है जो कॉमेडी, एक्शन और एडवेंचर को एक ही सिनेमाई पैकेज में समेटती है। इसकी अनूठी कहानी, जोशीला अभिनय, जंगल के ख़ूबसूरत नज़ारे और मनोरंजक पटकथा इसे फ्रेंचाइज़ी की एक ठोस कड़ी बनाते हैं। कुछ मामूली कमियों के बावजूद इसकी ख़ूबियां उन पर भारी पड़ती हैं, और मज़ेदार बॉलीवुड एडवेंचर की तलाश में बैठे दर्शकों के लिए यह एक बढ़िया चुनाव साबित होती है।

चाहे आप वेलकम (Welcome) सीरीज़ के पुराने फैन हों या बस कोई हल्का-फुल्का कमर्शियल एंटरटेनर ढूंढ रहे हों, यह फिल्म आपको एंड क्रेडिट्स तक बांधे रखने के लिए पर्याप्त ठहाके, रोमांच और सरप्राइज़ देती है।

Ashish Kathiriya